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मेरे अल्फाज़

तेवर दिवानी के

GAURAV LALWANI

11 कविताएं

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बंधे हो सर से पांवों तक घुन्घरु जवानी के
दिवाने लड़ जाते हैं हर एक तेवर दिवानी के

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