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मेरे अल्फाज़

अपनी मर्यादा......

GAURAV LALWANI

11 कविताएं

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मानवता के रिश्ते सभी निभाये,खत्म ना हो कोई मर्याद.
भूल के भी किसी का मन ना दुखाए, याद रखे अपनी मर्यादा,
सागर,गगन और धरा सब रहते अपनी सीमा मे, कभी ना लांघते ये मर्यादा,

सीमा के भीतर रहना हैं, कभी ना त्यागे हम मर्यादा,
कूल,परिवार का मान बडाये, सबके लिए आदर कायम करके हो मर्यादा,
कुदरत की हर शक्तिया रहती हैं,सदा प्रभु की मर्यादा मे,
मानव अपनी हद ना भुले, ना भुले अपनी मर्यादा......

 गौरव ललवानी

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