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मेरे अल्फाज़

मां गुरु होती हैं

GAURAV LALWANI

11 कविताएं

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हर माँ एक गुरु है उससे ही जीवन शुरू है,
माँ गिर कर सम्भलना, चलना, दौड़ना सिखाती है,
हम पर मुसीबत आने पर योद्धा जैसी ढाल बन जाती है,
बिना गुरु दक्षिणा दुःखों को भुलाकर अविरल प्रेम बरसाती है,
इसलिए हर माँ किसी न किसी रुप में गुरु कहलाती है!


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