तू सही थी (लघु कविता)

                
                                                             
                            तू हर जगह सही थी
                                                                     
                            
मैं काफी जगह गलत था
पर तूने कभी यह अहसास
न होने दिया
कि मैं गलत हूं
बस यहीं तू गलती कर गई
क्यों नहीं दिलाया तूने मेरा कर्त्तव्य याद
काश तू अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ पाई
या मुझे खोने से डरती थी।
शायद यह सही नहीं हैं
मैंने नहीं समझा अपना कर्त्तव्य
मैं भाग रहा था सच्चाई से
तुम ने हर बार याद दिलाया मुझे
कि अपना साथ असम्भव है।



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1 year ago

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