आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Tu sahi thi

मेरे अल्फाज़

तू सही थी (लघु कविता)

Gajendra Jakhar

3 कविताएं

21 Views
तू हर जगह सही थी
मैं काफी जगह गलत था
पर तूने कभी यह अहसास
न होने दिया
कि मैं गलत हूं
बस यहीं तू गलती कर गई
क्यों नहीं दिलाया तूने मेरा कर्त्तव्य याद
काश तू अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ पाई
या मुझे खोने से डरती थी।
शायद यह सही नहीं हैं
मैंने नहीं समझा अपना कर्त्तव्य
मैं भाग रहा था सच्चाई से
तुम ने हर बार याद दिलाया मुझे
कि अपना साथ असम्भव है।



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!