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मेरे अल्फाज़

फूल दिल में जो खिल नहीं सकते

Fouzia Naseem

28 कविताएं

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फूल दिल में जो खिल नहीं सकते।
ज़ख्म दिल के जो सिल नहीं सकते।।
दूसरों से तो मिल के देखा है।
क्या कभी ख़ुद से मिल नहीं सकते। ।
हादसा बन के हमसे मिल जाओ।
जब हक़ीक़त में मिल नहीं सकते। ।
जो लिखा है वही मिलेगा हमें।
अपनी क़िस्मत बदल नहीं सकते।।
बात करते हैं ,तवील राहों की।
दो कदम भी जो चल नहीं सकते। ।


-- डाॅ फौज़िया नसीम शाद


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