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मेरे अल्फाज़

तेरे नाम है...

Fareed Qamar

2 कविताएं

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मेरी ज़िन्दगी की हरेक ख़ुशी
मेरी ज़िन्दगी का हरेक ग़म
मेरी ज़िन्दगी के ये रास्ते
मेरी ज़िन्दगी का हरेक क़दम
मेरी सोच भी, ये ख़्याल भी
मेरे हाथ में ये थमा क़लम
तेरे नाम है।

मेरी ज़िन्दगी की हक़ीक़तें
मेरी ज़िन्दगी की कहानियाँ
मेरी रास्तों की सऊबतें (परेशानी, मुश्किलें)
मेरी मंज़िलों की निशानियाँ

मेरी ज़िन्दगी की उमंग भी
मेरी ज़िन्दगी की तरंग भी
मेरी ज़िन्दगी की उदासियाँ
मेरी ज़िन्दगी के ये रंग भी

मेरी ज़िन्दगी का नशेब भी (उतार, गहराई)
मेरी ज़िन्दगी का फ़राज़ भी (चढ़ाव, ऊँचाई)
मेरी ज़िन्दगी का ये सोज़ भी
मेरी ज़िन्दगी का गुदाज़ भी

मेरी ज़िन्दगी का हरेक दिन
मेरी ज़िन्दगी का हरेक कल
मेरी ज़िन्दगी की हरेक सदी
मेरी ज़िन्दगी का हरेक पल

मेरी ज़िन्दगी के ये ख़्वाब भी
ये सवाल भी, ये जवाब भी
सभी बाब भी (chapters, अध्याय)
मेरी ज़िन्दगी की किताब भी
तेरे नाम है।

ये जो उजली उजली सी सुब्ह है
ये जो महकी महकी सी शाम है
मेरी ज़िन्दगी का वरक़ वरक़
तेरे नाम है।

- फ़रीद क़मर

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