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मेरे अल्फाज़

शांति की सुंगध फैला तू

Ekta Kocharrelan

4 कविताएं

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शांति की सुंगध फैला तू
विवादों के फैसले में मत पड़ तू
हिन्दू हो या मुस्लिम
शांति की सुंगध फैला तू
मेरे भारत की संस्कृति में
अपनेपन की थी नींव
उन जडों को खोखला मत कर तू
शुक्र कर उस प्रभु का
जिसने तुझे बख्शा है
ये जीवन
हवा का रुख कैसा भी हो
मौसम मत बदल तू
वाहेगुरु कह के पूजा उसे
या फिर कह अल्लाह
ऊँ कह या फिर कह यीशु
मजहब के नाम दिलों में
नफ़रतें मत भर तू
सब की नज़रें टिकी है
फैसले पर," ऐ मानव"
तू मानव ही रहना
शांति की सुंगध फैला तू
राम हो या अल्लाह
बसा है हर दिल में
अपनी नज़र को ही बदल तू विवादों में मत पड़ तू
शांति की सुंगध फैला तू
एकता कोचर रेलन( हरियाणा)


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