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मेरे अल्फाज़

हम उनको भूल गए

Durgesh Kulshrestha

12 कविताएं

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हम उन को भूल गए"

"जब भी हम अपनी परंपरा और सिद्धांतों को भूले हैं उसके मूल में हमारे बच्चे हमको भूले हैं|

ना आज दादा दादी की कहानी है,"ना नाना नानी के झूले हैं , यही तो है दुर्भाग्य हमारा हम उनको, हमारे बच्चे हम को भूले है|

जो हमने दिखाया उनको ," भूल कर अपनों को वही उन्होंने सीखा है उनके हिसाब से वही जीने का तरीका है ||

हम कहते हैं सभ्य अपने को ,"जो परंपरा और सभ्यता को भूले हैं | अजब दुर्भाग्य हमारा हम उनको और वे हमको भूल हैं||

कृपया अब तो जागे," चलो समाज को फिर से गढ़ते है| पतन निवारण हेतु एक दूसरे का हाथ थाम कर चलते हैं

दुर्गेश कुमार कुलश्रेष्ठ


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