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मेरे अल्फाज़

आज का अजब दुर्भाग्य हमारा

Durgesh Kulshrestha

12 कविताएं

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"आज का अजब दुर्भाग्य हमारा""

 रामायण जी और गीता जी की चौपाईयां,
सुनकर पढ़कर बड़े हुए कितनी प्यारी व्यवस्था थी|
 हमारे माता पिता ने हमें गढ़ दिया आत्मीयता प्रेम, चरित्र व्यवहार का उत्तम ज्ञान कूट-कूट कर भर दिया |

 देखो अजब दुर्भाग्य हमारा उन्हीं की हम संतान अपने बच्चों को पढ़ाना भूल गए, गढ़ना भूल गए||

 फिर हम चीख चीख कर रोते हैं, कि हमारे बच्चे हमको भूल गए! दरअसल हम उनको गढ़ना भूल गए|

 जानते हैं ज्ञान और धर्म उसको अपने जीवन में उतारना भूल गए |
आज का अजब दुर्भाग्य हमारा आत्मा विश्लेषण करना भूल गए

दुर्गेश कुमार कुलश्रेष्ठ


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