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मेरे अल्फाज़

तिनकों का आशियाँ

Durgesh Chaurasia

2 कविताएं

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आशियाँ तिनकों के भी होते हैं!
माना बड़े नाज़ुक होते हैं,
बन्धन मजबूत होते हैं।
किंतु प्यार उनमें भी बसता है।
आशियाँ तिनकों के भी होते हैं!.....
गर्मी में कुम्हला जाते हैं,
सर्दी में ठिठुर जाते हैं,
बारिश में पानी पानी हो जाते हैं।
किंतु छाँव उनमें भी होती है।
प्यार उनमें भी बसता है।
आशियाँ तिनकों के भी होते हैं!......
यहाँ ओट है नोट नहीं, चोट है खोट नहीं।
भौतिकता की कमी, लोट-पोट ही सही।
किंतु घाव उनमें भी होते हैं।
प्यार उनमें भी बसता है।
आशियाँ तिनकों के भी होते हैं!.....

- दुर्गेश चौरसिया
आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश)

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