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मेरे अल्फाज़

हमारा रास्ता ना रोकें

Anonymous User

15 कविताएं

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आंधियों से कह दो हमारा रास्ता ना रोकें
डरा नहीं सकते हमें ये तेज़ हवा के झोंके

आंधियों की औकात क्या तूफानों की बिसात क्या
रास्ता दें छोड़ पर्वत जब हम गुजरें वहां से होके

ये गड़गड़ाता आसमां और दनदनाती बिजलियाँ
बुझा नहीं सकते हमारी हसरतों के चऱाग बरसात में भिगो के

हम बने हैं वो सफीना जो सागरों का चीर सीना साहिलों को धार लें
फिर लहर क्यों इतरा रही है मझधार में कुछ कश्तियाँ डुबोके

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