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gazal Ibadat to ki hoti

मेरे अल्फाज़

इबादत तो की होती

Dr.Shyam Kunvar

2 कविताएं

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बुजुर्गो दुआ सलाम न सही सामने थोड़ी सराफ़त तो की होती
दुआओ बड़ा असर होता मान खुदा थोड़ी इबादत तो की होती

आज तुम जवा हो क्या कायम रहेगी ये जवानी तेरी उम्र भर
बचा रखा होता जोश ए जनून थोड़ी हिफाजत तो की होती

उनको लगता है मंडरा रहे है शौहर पराई तितलियों बन भौरा
भर आंखो मे प्यार हुश्न ए जलवा थोड़ी नजाकत तो की होती

मुझसे नहीं है मोहब्बत तो कोई बात नहीं ये जान ए जिगर
इश्क के मारो बेजारो नजरे करम थोड़ी इनायत तो की होती

हो रहे गुमराह बच्चे आज इंटरनेट और मोबाइल के फिराक मे
दिखाने मंजिल सही नादान बच्चो थोड़ी अदावत तो की होती

जो वक्त आया ही नहीं उसकी फिक्र की जरूरत क्या है
बना लो हौसला वक्त बदलने थोड़ी हिमाकत तो की होती

कहते हो बेरोजगार है क्या करे कुछ समझ आता नहीं
मिल भी जाती नौकरी तुमको थोड़ी मसक्कत तो की होती

क्यों बंद कर रखा है दिल के सारे दरवाजे तुमने भारती
बनते खुशदिल मिलते सबसे दिल थोड़ी इजाजत तो दी होती

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