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मेरे अल्फाज़

यह बादल का टुकड़ा

Drminal Aggarwal

301 कविताएं

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आसमान
खाली था
न जाने
एकाएक
कहीं से बादल घुमड़ आये
और उसके मन मस्तिष्क के
पटल पे छा गये
यह बादल का टुकड़ा
एक अहसास है या
एक याद है
पता नहीं
कहीं किसी प्यासी धरा पे
टूटकर बरस जाये तो
क्या प्यार है
संकुचित है या विस्तृत
एक मुट्ठी या एक
अंजुली सागर की
रुकेगा या चला जायेगा
जीवन के किस मोड़ तक
साथ निभायेगा
क्या आखिरी सांस तक
पर प्यार कोई बंधन है
जो परछाई की तरह संग
खड़ा रहे हरदम
तभी साबित हो पाये कि
प्यार निभाया जायेगा।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001


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