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मेरे अल्फाज़

कांटों के झाड़

Drminal Aggarwal

569 कविताएं

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कांटों के झाड़ उग गये हैं
मेरे तो चारों तरफ
कोई इन्हें काटने वाला भी नहीं
मिल रहा
यह तो दिन प्रतिदिन
बढ़ते ही जा रहे हैं
मेरा फूल सा दामन छीलते हुए
मुझे कैद करते जा रहे हैं
मेरी ही पनाहों में
मैं तन्हा थी
मुझे और तन्हा करे जा रहे हैं
इन कांटों के झाड़ में
छोटे छोटे फूल कब खिलेंगे
जिन्हें मैं देख न पाऊं तो
उनकी सुगंध से उन्हें
पहचान पाऊं
किस उम्मीद से जीवन की डोर
बांधू
जो इस घुटते हुए माहौल में
कुछ पल तो ले सकूं सांस मैं।

- मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001

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