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मेरे अल्फाज़

जमीं की डोर से

Drminal Aggarwal

244 कविताएं

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मेरी पतंग है
मेरी डोर है
मेरा आसमान है
मेरी जमीन है
जब तक जीवित है
मेरे मन में
एक बच्चा
यह दुनिया मेरी है
दुनिया की हर छोटी बड़ी खुशी
मेरी है
हर चीज पे मेरा हक है
पतंग से जुड़ी डोर की तरह
डोर से जुड़े मेरे
हाथों की अंगुलियों के पोरों की
पकड़ की तरह
पतंग से जुड़े आसमान की तरह
आसमान से जुड़ी जमीन की तरह
जमीन से जुड़े मेरे तन की तरह
तन से जुड़े मेरे मन की तरह
मन से जुड़े हर भाव की तरह
जमीं के हर रास्ते से
जुड़ती मेरे मन की
मंजिल की तरह
जीवन की हर राह मुझसे जुड़ती है
इस दुनिया की हर बात मुझसे
जुड़ती है
जमीं की डोर से आसमां में उड़ाई
पतंग की तरह।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001



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