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मेरे अल्फाज़

बीती रात एक ख्वाब सी

Drminal Aggarwal

571 कविताएं

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रात भर
बिना हवाओं के
बिना आंधियों के
कमरे के दरवाजे खटकते रहे
खिड़कियों के शीशे चटकते रहे
सुबह हुई तो
सब खामोश थे
बीती रात एक ख्वाब सी
लग रही थी
कोई तो था जो
मेरी रूह को छूकर गया था
दिल दिनभर गुमसुम
उदास बिना किसी से कुछ कहे
उसके होने के निशान
ढूंढता रहा।

- मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001

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