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मेरे अल्फाज़

आसमान की लकीर

Drminal Aggarwal

76 कविताएं

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आसमान की कोई लकीर
न कोई रंग
न कोई तस्वीर
न कोई पगडंडी
न कोई तहरीर
चारों तरफ बस धुंआ ही धुंआ
और मेरा मन जैसे
नाचता सा कोई फकीर
किस छोर से खोलूं
किस छोर से पकडूं
तुम्हारे बिना सब स्थिर है
मौन है
एक जैसा है
अधीर है
न धरातल न आसमान
कहाँ खोजूं अपने बिछड़ों को
यह तड़प तो मार ही देगी
मुस्कुराहट भी विचलित कर देगी
आंसू के समुन्दर कहाँ खोजूं
जो विचार रही इस सूखे मरुस्थल में।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001


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