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Manavta

मेरे अल्फाज़

मानवता...

DrKalpana Tomar

1 कविता

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मानव तुझे क्या हो गया?
क्यों तू दानव सम हो गया?
मानवता आज लुप्त हो रही
संवेदना भी विलुप्त हो गई
द्रवित ह्रदय आज शुष्क हुए
मन करुणाविहीन खुश्क हुए
लोगों का गम तुझे अब
क्यों नहीं चुभता?
दुःख देख औरों के अब
क्यों नहीं रोता?
मानव तुझे क्या हो गया?
क्यों तू दानव सम हो गया?

अबला नारी की लज्जा भंग पर
क्यों दृष्टिहीन बन जाता है?
लहूलुहान घायल को देखकर
निष्ठुर वीडियो फ़िल्म बनाता है
कलह के दृश्य देख ठिठककर
रसिक दर्शक बन जाता है
मजबूर व्यक्ति की याचना को
अनसुनाकर आगे बढ़ जाता है
मानव तुझे क्या हो गया?
क्यों तू दानव सम हो गया?

ये स्थिति बद से बदतर होकर
किस ओर तुझे ले जाएगी?
स्वार्थपरता और कठोरता
किस लक्ष्य तक पहुचाएगी?
कब तक इंसानियत तेरे अंदर
बंदी की तरह चीत्कारेगी?
क्या मानवता तेरे अंदर
यूँ ही छटपटाकर मर जायेगी?
मानव तुझे क्या हो गया?
क्यों तू दानव सम हो गया?

- डॉ कल्पना तोमर

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