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मेरे अल्फाज़

ख़्वाब

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ख़्वाब
हां ख़्वाब ही तो है
ये रिश्तें
आभासी दुनिया के,
कहने भर से नही होता
कोई यहां अपना.....

जागती आंखों से
कुछ ख़्वाब है
देखे मैंने....
कुछ टूटकर बिखरे
तो
कुछ को सहेजकर
रखा मैंने....

हे ईश्वर....बस
इतनी इनायत करना,
भले ही टूटकर
बिखरुं मैं पर
ख़्वाब न बिखरने देना
माना है जिन्हें अपना
साथ उनके ताउम्र
चलने देना....

आंखों मे मेरे
ये हसीं ख़्वाब
हमेशा
सजाये रखना ,
जैसी हूं मैं
मुझे वैसी ही
बनाये रखना !!

✍मोहिनी गुप्ता
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