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मेरे अल्फाज़

राहत की चाहत

Dr.bhim Singh

40 कविताएं

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राहत की चाहत में , कलम अश्रु वह जाए।
चाहत मेरी छोड़ के , राहत कहां तू जाए ।।

शब्द लड़ी बनाए के , तुमने दिया जो भाए।
हृदय वेदना कम करे, सुनते राहत आए ।।

बरबस हृदय कचोटता , अश्रु बहै बन धार ।
शब्द हुए अनाथ सब , सूना है संसार ।।

चाहत राहत क्या कहूं , आफत बनती जाए।
दीवानगी मेरी देख लो , लौटो राहत भाए ।।

भाग्य धनी वो लोक है , जहां पे राहत जाए।
चाहत उनकी है प्रबल , दर्जा राहत पाए ।।


-- डॉ भीम सिंह "चौतरवा "


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