आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Kuch log dikhe hathiyar liye

मेरे अल्फाज़

कुछ लोग दिखे हथियार लिए

Dr.bhim Singh

51 कविताएं

292 Views
कुछ लोग दिखे हथियार लिए , थे चौक खड़े अति भोर भये
था तन दुर्बल मन भीषण था , मानो रण में हों सैन्य गये
जठराग्नि उठी भयक्रांत किए , है महासमर जीवन के लिये
थे श्रमिक सभी यह कहते हैं , रचते हैं सदा कुछ नये नये

दृग लक्ष्य पे लक्षित ऐसे हुआ , मानो कोई संत समाधि लिये
भष्माग्नि को केवल संत धरे , ये पंचभूत अंग राग किये
देखे जब लक्ष्य महायोद्धा , त्रय ताप हटे नव रंग भये
अम्बर को ओढ़ शयन करते , धरती पे पड़े धरती के जये

श्रृंगार धरा का करते हैं , धरती के असली पुत्र यही
देते बीहण को रम्य रूप , यह बात ग्रंथ में भी है कही
जगत रचयिता ब्रह्मा भी , स्वीकृत करते हैं कार्य सही
अस्त्र शस्त्र सब चलते हैं , गति सृष्टि रुकें वो रुकें नही

ईश्वर का वरदान अनोखा ,धन्य धरा जब पायी है
पुत्र को पाकर गर्वित होती , अदभुत रूप दिखाई है
पोषण पा प्रकृति का ऐसा ,आयु आय पर धाई है
निरीह दूर कुछ बैठे जग में , आय आयु को खाई है

डॉ भीम सिंह " चौतरवा "

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!