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मेरे अल्फाज़

मसीहा तलाश कर

DrAnand Kishore

36 कविताएं

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तारों भरी है रात इशारा तलाश कर
जाना तुझे सफ़र पे है रस्ता तलाश कर

उल्फ़त का इस जहाँ में ख़ज़ाना तलाश कर
या फिर जहाँ में एक मसीहा तलाश कर

इन्सानियत कहाँ है सदाक़त कहाँ गई
झूटा समाज छोड़ दे सच्चा तलाश कर

कर फ़ैसला न कौन सगा कौन ग़ैर है
पहले तो ख़ुद से ख़ुद का ही रिश्ता तलाश कर

रोटी मिले दो वक़्त की जीने के वास्ते
जीने का इक सवाल है ज़रिया तलाश कर

बेदम मुसाफ़िरों की घटा दे तू मुश्किलें
आसां सफ़र हो उनका तरीका तलाश कर

पढ़-लिख के आज देख मिली नौकरी कहाँ
अब तो कोई भी छोटा सा धन्धा तलाश कर

मुमकिन है काम तीन से आसान हो ज़रा
मेरे तेरे को छोड़ के तीजा तलाश कर

'आनन्द' बोझ रोज़ ही ढ़ोना है जब तुझे
फिर से नये ग़मों का ज़ख़ीरा तलाश कर

~ डॉ आनन्द किशोर

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