आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Mera Mujhe Laura Do

मेरे अल्फाज़

मेरा मुझे लौटा दो

Dr Raj Kumar Pandey

9 कविताएं

39 Views
मेरा मुझे लौटा दो

हम अजनबी से मिले थे
धीरे-धीरे जाने थे
एक दूसरे को
जाने थे पसंद नापसंद
एक दूसरे के
सह-अस्तित्व का भाव लिए
वो चलना और चलते जाना
जीवन के पथ पर
दुःख-सुख जीवन के दो पहिए
ना होते थे हम विचलित
हर परिस्थिति में डंटकर
चलते थे सदा ही पुलकित
समय बदलता है
हमरा भी बदला है
अब वैसा नहीं है
जैसा पहले था
बदला है नज़रिया
नज़र भी बदली है उनकी शायद
अब वो जज्बा नहीं
चहलकदमी करने का साथ-साथ
तभी तो ये अलगाव है
जीने के तरीके में बदलाव है
अलग-अलग राहें
अलग-अलग मंजिल भी है
अब शेष है तो बस गणित
फलित तो दिख रहा है
सिर्फ हिसाब बाकी है
समय का
जो वर्षों तक खर्च किए
ना चाहते हुए भी मन कहता है
मेरा मुझे लौटा दो।

.......... रचनाकार
डॉ राज कुमार पाण्डेय
टेकनगाढ़ा आजमगढ़


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!