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नज़र मिल रही थी

                
                                                                                 
                            पल-पल दिल की ख़बर मिल रही थी।
                                                                                                

हमारी भी तुमसे नज़र मिल रही थी।।
मिलना ही तुमसे मुकद्दर था शायद।
तेरी रहगुज़र से गुज़र मिल रही थी।।
बिछड़ने का तुमसे डर भी नहीं था।
रातों से मेरी,तेरी सहर मिल रही थी।।
धड़कते थे शायद तुम्हारे ही दिल में।
हमें तेरे हिस्से की उमर मिल रही थी।।
पल-पल दिल की ख़बर मिल रही थी।
हमारी भी तुमसे नज़र मिल रही थी।।

-डाॅ फौज़िया नसीम शाद
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3 months ago

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