आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   ऐ ग़रीबी तेरी सूरत बदल क्यों नहीं जाती

मेरे अल्फाज़

ऐ गरीबी तेरी सूरत बदल क्यों नहीं जाती

Dr fouzia

483 कविताएं

421 Views
ये एहसास-ए-महरूमी तेरी क्यों नहीं जाती ।
ऐ ग़रीबी तेरी सूरत बदल क्यों नहीं जाती ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!