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मेरे अल्फाज़

यूं न जा दिल तोड़कर

Divyanshu Anshu

15 कविताएं

35 Views
मुझसे खता हुई क्या, कम से कम इतना तो बतला दो;
किस बात से हो नाराज, कम से कम इतना तो बदला दो |
अगर चली जाओगी तुम तो मैं कैसे रह पाऊंगा;
तुमसे बिछुड़न की ज्वाला को मैं कैसे सह पाऊंगा |कैसे जी पाऊंगा यूं मायूसियों को ओढ़कर.....
ओ मेरे ख्वाबों की मल्लिका यूं न जा दिल तोड़कर|
ओ मेरे सपनों की रानी यूं न जा दिल तोड़ कर ||

भूल गई क्या उन दिनों को जब ,दो जिस्म एक जान थे हम ;
मैं तेरा ,तू मेरी थी ,एक दूजे की पहचान थे हम |आओ फिर से हम अपनी उन्हीं यादों में खो जाएं आओ फिर से हम एक दूजे की बाहों में सो जाएं एक अमर रिश्ता बना लें दो दिलों को जोढ़ कर...
ओ मेरे ख्वाबों की मल्लिका यूं न जा दिल तोड़ कर ओ मेरे सपनों की रानी यूं न जा दिल तोड़ कर ||

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