अंदर के तूफ़ान को जगा के रख हरदम

                
                                                             
                            गुलशन कर दे गुलज़ार को,
                                                                     
                            
रोशन कर दे इस जहां को,
जज़्बा तेरा ना होने दे थोड़ा भी कम,
तेरे अंदर के तूफ़ान को जगा के रख हरदम।

तेरे अंदर की भूख को मिटने मत दे,
चल थोड़ी प्यास और जगा ले,
तेरे प्रयासों का ये सिलसिला ना कभी करना तू कम,
पाने को ये सारा जहां थोड़ा और लगा तू दम।

चला ना जाए राह-रो तो थोड़ा विश्राम कर ले,
किसी पेड़ की छाया में जन्नत का दीदार तू कर ले,
थोड़ी देर चल भूला दे सारे गम,
तू अब मत ज़रा सा भी सहम।

जज़्बा तेरा ना होने दे थोड़ा भी कम,
तेरे अंदर के तूफ़ान को जगा के रख हरदम.....

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8 months ago
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