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मेरे अल्फाज़

जीवन संगिनी

Dinesh Tyagi

3 कविताएं

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जीवन संगिनी

ज़िंदगी के हर कदम पर साथ चलने वाली जीवन संगिनी
हर गुण-अवगुण के साथ हमको अपनाने वाली जीवन संगिनी

अपना घर छोड़ कर दूसरे घर जाने वाली
अपने सपनों को भूल जाने वाली
सबको खुशी से अपनाने वाली-जीवन संगिनी

हर दर्द को हंस कर सहने वाली
सब कुछ करके भी कुछ न कहने वाली
जीवन के हर मोड़ पर ताल मिलाने वाली-जीवन संगिनी

चाँद की चाँदनी जैसी-फूलों की खुश्बू जैसी
दिल की धड़कन जैसी-आँखों की रोशनी जैसी
यमराज से भी अपने पति को वापिस लाने वाली

-जीवन संगिनी

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