आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   yun bhi apnon ko ajmaya kar

मेरे अल्फाज़

यूं भी अपनों को आजमाया कर

Dinesh Pratap

91 कविताएं

49 Views
यूं भी अपनों को आजमाया कर
झूठ को सच ही मान जाया कर

सदावरकी भी इतनी ठीक नहीं
कुछ दिनों को तू रूठ जाया कर

ज़िंदा रहने का तू कुछ तो सुबूत दे
कटे सर फिर भी तू उठाया कर

मौत तो सिर्फ सूद है इसका
ज़िन्दगी का कर्ज चुकाया कर

लुत्फ़ है इसमें ज़िंदगानी का
रूठ ले, फिर तू मान जाया कर

छेड़छाड़ सच में चल नहीं सकती
झूठ को घटा या बढ़ाया कर

- दिनेश प्रताप सिंह चौहान

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!