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मेरे अल्फाज़

सत्ता-दौलत

Dinesh Pratap

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सत्ता शोहरत दौलत सारे छूट भी सकते हैं
रिश्ते धागे सपने शीशे टूट भी सकते हैं
ज्ञान प्रेम और चरित्र का सरमाया लुट न सके
धन और दौलत चोर लुटेरे लूट भी सकते हैं
संगत वातावरण चेतना का जब संगम हो
कविता गीत ग़ज़ल अधरों से फूट भी सकते हैं
तीर और तलवारों से भी नहीं खरोंच जिन्हें
वो दिल शब्दों की कटुता से टूट भी सकते हैं
दुर्वय्वहारों ने तोड़े हैं खून के जो रिश्ते
व्यवहारों से हो रिश्ते मज़बूत भी सकते हैं

दिनेश प्रताप सिंह चौहान

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