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मेरे अल्फाज़

रातों को भी अदालत

Dinesh Pratap

120 कविताएं

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नेताओं को खुल रहीं रातों को भी अदालत
आम जनों को भी भला मिलेगी क्या ये राहत
मिलेगी क्या ये राहत जवाब हमें चाहिए
हम हैं जनता हमको भी ये न्याय चाहिए
ये अंधेर नहीं बदला तो मैं बतलाऊँ
देश में होगी क्रांति सुनो सुन लो नेताओं

दिनेश प्रताप सिंह चौहान

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