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मेरे अल्फाज़

सावन की प्यास

DINESH KUMAR PANDEY

1 कविता

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गीत -"सावन की प्यास"

लिख दे कोई गीत जिंदगी, मैं दे दूँ आवाज।
प्रिय शब्दों से भाव रचूं मैं, सुर से दे तू साज॥

चाहे लिख पतझड़ का मौसम, चाहे लिख मधुमास।
चाहे लिख दे तपिश धूप की, या सावन की प्यास।
मन को चाहे वृन्दावन लिख, या कान्हा का रास।
छंद भरे अधरों से लिख दे, रूठे मन की आस॥

तरुवर की तरुणाई से लिख, नित्य नये अंदाज।
लिख दे कोई गीत जिंदगी, मैं दे दूँ आवाज॥

कलियों का मदमाता यौवन, लिख भौरों की आह।
दसों दिशाएँ करदे गुंजित, लिख दे प्रेम अथाह।
जीवन रूपी सजे वाटिका, लिख मधुरिम निर्वाह।
घर आँगन हो जाये सुरभित, लिख फूलों की चाह॥

चन्दनवन की शीतलता का, लिख फिर से आगाज।
लिख दे कोई गीत जिंदगी, मैं दे दूँ आवाज॥

सागर की गहराई से लिख, लहरों की झनकार।
अंबर की ऊँचाई से लिख, मेघों की जलधार।
तूफानों से मिलकर लिख दे, मारुत की टंकार।
मुझमें हो विश्वास अटल यदि, लिख दे मन में प्यार॥

पर्वत जैसा बढ़े हौसला, लिख नूतन परवाज।

लिख दे कोई गीत जिंदगी, मैं दे दूँ आवाज॥

दिनेश कुशभुवनपुरी
चाँदपुर-बरौंसा, कुशभुवनपुर (सुलतानपुर) (उ.प्र.)
वाराणसी


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