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मेरे अल्फाज़

तेरी खामोश नजरों के इशारे...

Dinesh Kumar

90 कविताएं

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तेरी खामोश नजरों के इशारे मुझको दीवाना करते हैं
तेरी आंखों के नीले सितारे मुझको मतवाला करते हैं

बहके-बहके से कदम तेरे चाल भी लगती शराबी हैं
जरा संभल कर चला कर तेरी गली में आवारा रहते हैं

जुल्फें तेरी घटाओं सी लहराए पलकें भी झिलमिलाती हैं
जब तू घर से निकलती है गली के मजनू तेरी बातें करते हैं

चेहरा तेरा गुलाबी-गुलाबी होंठ भी लगते रसीले हैं
तेरे सुर्ख लाल होठों की मुस्कान पर दीवाने मरते हैं

जो तुम इतनी मोहब्बत करती हो ‘दिनेश’ से
इस तड़पन में शहर के लाखों परवाने जलते हैं

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