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मेरे अल्फाज़

देश भक्ति: सागर से दरिया उठा लाया हूँ

Dinesh Kumar

42 कविताएं

482 Views
सागर से दरिया उठा लाया हूँ
माँ तेरे चरणों को धोने
आंसुओं के सैलाब लाया हूँ
अमन के रखवालों का
सरहद के पहरेदारों का
तेरे प्यारे जिगर के टुकड़ो का
ये पैगाम लाया हूँ
उठी नापाक नजर जो भी
लहू के दरिया बहा देंगे
तेरी शान और शौकत में
हम शीश कटा देंगे
पर कोई नापाक कदमों को
ना पड़ने देंगे आंगन में
है आरजू बस यही मेरी
चारों दिशाओं में एक तराना हो
वंदेमातरम् - वंदेमातरम्
वंदेमातरम् ! माँ

#AzadAlfaz
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