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मेरे अल्फाज़

बेवजह पलकों पर बोझ डाला नहीं जाता

Dinesh Gupta

39 कविताएं

12 Views
बेवजह पलकों पर बोझ डाला नहीं जाता
तेरा ख्वाब आँखों में और पाला नहीं जाता

यूँ तो तुझको भूलने की कोशिश में हैं मगर
जिक्र तेरा हर बात पर टाला नहीं जाता

जो रख दिया हाथ अंगारों पर एक बार
ताउम्र हथेली का छाला नहीं जाता

जो बुझती है इश्क की लौ तो बुझने दो
इस आग में अब ओर घी डाला नहीं जाता

आप कहते हैं इस मुल्क को बरबाद कर देंगे
अजी छोङिये, एक पत्थर तो आपसे उछाला नहीं जाता

इस शहर में कोहराम है पर आपको आराम है
हमारे तो हलक से एक निवाला नहीं जाता 

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