इन्तकाम की आग में.....

                
                                                             
                            इश्क़ में नाकाम होने के बाद
                                                                     
                            
इन्तकाम की आग में जल रहा है वो,
दीवार की ओट तो कभी गलियों में
कई सालों से इंतजार कर रहा है वो।

आज उसने जब खुलकर कह दिया
कलियों की अपनी अदा होती है,
खिलने के पहले वो अपने ही गुलशन में
बेफिक्र और खुद से जुदा होती हैं।

जो काबलियत और हुनर से जीते
खिलकर फूल तो उसी का होता है,
मस्तियाँ अठखेलियाँ और भागने से
जिंदगी का मकसद पूरा नहीं होता है।

दिनेश चौहान

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1 month ago
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