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मेरे अल्फाज़

हकीकत

Dileep Kumar

2 कविताएं

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हम ही मस्जिद गिरवाते हैं,
हम ही मंदिर बनवाते हैं,
बस्तियों में आग लगवाते हैं,
फिर बाद में हम ही कंबल बंटवाते हैं,
ये हकीकत है हम हुक्मरानों की।

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