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मेरे अल्फाज़

कल तो धोखेबाज़ है

Dhruv Thapar

22 कविताएं

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सदियों से बैठे हैं लोग कल की प्रतीक्षा में
पर ये कल कभी आया ही नहीं
सब किनारे पर ही बैठे रह गए
इसने किसी की नैया को पार लगाया ही नहीं।

तू कल की राह न देख
आज से ही परिश्रम करने में लग जा
ये कल बहुत धोखेबाज़ है
तू इसके कपट से बच जा
तू इसके कपट से बच जा।।

ध्रुव थापर


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