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मेरे अल्फाज़

फौजी की अरदास

Dhruv Thapar

22 कविताएं

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यमराज,अपने वतन की हिफाज़त के लिए,
मुझे कुछ और गोलियाँ खाने दो।
अपनी भारत माँ के साथ मुझे,
कुछ और समय बिताने दो।

मरने से पहले मैं शेष दुश्मनों को मार दूँगा,
उनके गरूर को मैं मिनटों में उतार दूँगा।

जीवन के कुछ आखरी पलों में,
भारत भूमि पर अपने खूँ से
मुझे लक्षमन रेखा बनाने दो
ताकि कोई भारत पर आँख उठाकर भी न देख पाए,
अगर फिर भी कोई हिम्मत करे,
भारत पर आँख उठाने की
तो जि़ंदा वापिस न जा पाए।

यमराज,फिर मैं हसते हसते,
तुम्हारे साथ यमलोक चलूँगा।
और हाँ धरती माता
अपना अगला जन्म भी मैं,
तुम्हारे नाम कर दूँगा
तुम्हारे नाम कर दूँगा।
वंदे मातरम।वंदे मातरम।

ध्रुव थापर


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