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मेरे अल्फाज़

मेरा गांव

Dheerendra Dwivedi

10 कविताएं

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कितना सुन्दर कितना प्यारा
सबसे अच्छा गांव हमारा
यहां मोर का नृत्य मनोहर
कोयल गाती कितना सुन्दर
हवा बहे है सुखद सुहानी
जहां बाल मन की मनमानी
पीपल पर चिड़ियों का डेरा
महकी मोजर हुआ सबेरा
गैय्या बछिया मुर्गी बकरी
चना चवेना गोंइठा लकड़ी
भोला मानस संगत निश्छल
गांव बुलाये सबको हरपल
धूल धुआं न आपा धापी
चैता कजरी फगुआ थाती
मन भावन हैं लोग यहां के
मन भावन है गांव हमारा
कितना सुंदर कितना प्यारा
सबसे न्यारा गांव हमारा।

धीरेन्द्र द्विवेदी

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