आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Best friends

मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल "दोस्त पुराने वाले"

dheeraj nigam

16 कविताएं

211 Views
अब यूँ भी हम घर नहीं जाने वाले
आ रहे हैं आज कुछ दोस्त पुराने वाले

अब जो खाली बैठा हूँ तो खाली न जान मुझे
एक वक्त पे थे हम समन्दर में आग लगाने वाले

तेरा शहर से जाना मेरी जान ले गया जानां
उस पर भी लोग आए हैं कमबख़्त दिल दुखाने वाले

इस शहर में बच्चे भूख से मरते हैं
इस शहर में रहते हैं कई लोग खजाने वाले

ग़ज़ल बस तेरी खातिर मैंने मय से दिल लगाया
वरना 'धीरज' हम तो आदमी थे शरीफ घराने वाले

- धीरज प्रकाश

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!