तुम ग़र शराब हो

                
                                                             
                            हर वक़्त बेकार में सर पर मत चढ़ा करो
                                                                     
                            
दिमाग़ ठंडा रहेगा थोड़ी शायरी पढ़ा करो

तुम ग़र इज़्तिराब हो तो रफ्ता-रफ्ता बढ़ा करो
तुम ग़र शराब हो तो आहिस्ता-आहिस्ता चढ़ा करो

सुना नहीं क्या बहरे हो कबसे जवाल पे ठहरे हो
कभी आसमां की बुलन्दियां भी चढ़ा करो

तमाम उम्र क्या दूसरों का रचा ही पढ़ते रहोगे
कभी तुम भी तो कोई नया इतिहास गढ़ा करो

जन्नत दुनिया से बड़ी है मौत जन्नत लिए खड़ी है
'नामचीन'हमेशा ये झूठी कहानियाँ मत गढ़ा करो

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1 month ago
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