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मेरे अल्फाज़

सितम की तलवार अभी थमी नहीं है

Dharvender Singh

139 कविताएं

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यूँ तो मेरे दोस्तों की अब भी कोई कमी नहीं है
मगर दोस्ती की मेरी तलाश अभी थमी नहीं है

वो आंखें आंखें नहीं महज़ शीशा हैं
जिन आंखों में हमदर्दी की नमी नहीं है

वो अगर चाहे तो मरते को भी जिन्दगी दे दे
खुदा के घर रहमतों की कोई कमी नहीं है

टुकड़े-टुकड़े हो गया दिल'नामचीन'का मगर
उनके सितम की तलवार अभी थमी नहीं है

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