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मेरे अल्फाज़

मुस्कुराना सीख लो

Dharvender Singh

137 कविताएं

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दुख-दर्द सीने में छुपाना सीख लो
खुशी मिले या गम मुस्कुराना सीख लो

जिंदगी हंसते-गाते बिताना सीख लो
जिंदगी के साज का ये तराना सीख लो

दुश्मनी गई भाड़ में दोस्ती की आड़ में
दुश्मन को भी गले लगाना सीख लो

किस्मतों की रक्कासा को मेहनतों के
हाथों की उंगलियों पर नचाना सीख लो

किसी नई तरकीब से नफ़रतों की सरजमीं पे
मुहब्बतों के गुल खिलाना सीख लो

'नामचीन' मिसरा तो तुम अच्छा लगा लेते हो
गज़ल में मकता भी उम्दा लगाना सीख लो

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