क्या पाना क्या खोना है

                
                                                             
                            किस बात पर रोते हो किस बात का रोना है
                                                                     
                            
जो तहरीर-ए-मुकद्दर में है लाजिम वो होना है

इक बेवफा ने दिया है हमको नाम हरजाई का
ये दाग बेवफाई का हमें अपने दामन से धोना है

सिला वफ़ा का ग़र मिला नहीं उसका हमें गिला नहीं
जो किस्मत में था नहीं उसका क्या पाना क्या खोना है

नींद मौत की कोई सो गया तो क्या नया हो गया
आज नहीं तो कल इस नींद में हम सबको सोना है

नामचीन

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1 month ago
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