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मेरे अल्फाज़

हमने कितने दरिया पार किये हैं

Dharvender Singh

140 कविताएं

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जमीनों पे क्या रखा है आसमानों की सैर कर
फलक को छू ले परिन्दे हवाओं पर तैरकर

हम अगर तेरे हैं तो सरेआम ये एलान कर
हम अगर ग़ैर हैं तो सरेआम हमें ग़ैर कर

मुहब्बतों से अदावत क्यों करता है नादान
तुझे बैर ही करना है तो नफ़रतों से बैर कर

इश्क़ के व्यापार में फायदा तो कुछ है नहीं
मगर तुझे यही कारोबार करना है तो खैर कर

ऐ आसमां तू कब का जमीं पर आ गिरा होता
ये तो हमने तुझे अपने सर पर उठा रखा है खैर कर

'नामचीन' ये अदनी-सी लहर हमें खाक डुबोएगी
इसे मालूम नहीं हमने कितने दरिया पार किये हैं तैरकर

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