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मेरे अल्फाज़

हमें भी सुरूर है जवानी का

Dharvender Singh

74 कविताएं

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हम चुनौती स्वीकार करते हैं अगर दरिया को गुरूर है रवानी का
तैरकर इसे पार करते हैं हमें भी सुरूर है जवानी का

समझता है कि अपनी तेज बहती धार से या लहरों के वार से
डुबो देगा हमारे हौंसलों की कश्तियाँ तो ये फितूर है पानी का

- नामचीन

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