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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल का हर शेर अब तराना हो गया है

Dharvender Singh

74 कविताएं

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आज मौसम इतना सुहाना हो गया है
कि ये दिल फिर दीवाना हो गया है

फिर एक जाम नजरों से पिला दे साकी
खाली तेरे दीदार का पैमाना हो गया है

दिल को आज फिर उसकी याद आई है
उसकी गलियों से गुजरे एक जमाना हो गया है

ये मेरा मकाने-जिगर एक मुद्दत से
जमाने भर के गम का ठिकाना हो गया है

चैन कहीं चला गया सुकून कहीं खो गया
अजाब ये दिल का लगाना हो गया है

इस दर्दे- दिल की कोई और दवा दीजिए
नुस्खा-ए-शराब तो अब पुराना हो गया है

'नामचीन' इसी तरन्नुम से पढ़ते रहिएगा
ग़ज़ल का हर शेर अब तराना हो गया है

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