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मेरे अल्फाज़

अंजाम भी मिल जाएगा

Dharvender Singh

29 कविताएं

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तलाश करोगे तो कुछ न कुछ काम भी मिल जाएगा
इश्क़ करोगे तो इश्क़ का इल्ज़ाम भी मिल जाएगा

दिले-बेकरार तुझे आराम भी मिल जाएगा
साकी को तो आने दे फिर जाम भी मिल जाएगा

मुहब्बत में सब कामयाब ही हों जरूरी नहीं है
हमारी तरह कोई बदनसीब नाकाम भी मिल जाएगा

'नामचीन' नेकियों का सिला अब कहाँ मिलता है जमाने में
किसी की इम्दाद करके देख लो अंजाम भी मिल जाएगा

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