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मेरे अल्फाज़

कविता....... फूल किताबों में

Dharamveer Verma

65 कविताएं

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वो फूल जो कभी
तुमनें दिए थे
मोहब्बत की जमानत में
आज भी संजो रखे है
मैने उन्हें
अपनी किताबों में
वो लाल सुरमयी
सुर्ख गुलाब का फूल
जो हमारे इश्क की निशानी भी था
गूंगा था तो जरूर
पर
हमारे इश्क का बयानी भी था
आज उस फूल का रंग बदल गया
न खुशबुएं फूल में रहीं
न तेरी चाहते मुझसे रहीं
बस इक आफताब सा मैं तो ढल गया
वक्त ने ली करवटें
हालात मुझको छल गया
तभी तो तेरा
और तेरे फूल का रंग भी बदल गया
तुझे बेवफा कहूँ
या कहूँ
फूल को बेवफा
दोनों ही बेवफा हुए
इस कमबख्त जमानें में
निशां कोई तो रह जाए
तेरे दगा की निशानी में
तभी तो आज भी छुपा रखा है
वो सूखा फूल
मैने उन्हीं किताबों में
वो फूल जो तुमनें
दिये थे किसी जमानें में ।
....... धन्यवाद.....

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